शल्यग्रहण

महारथी कर्ण जब अर्जुन से युद्ध कर रहे थे तो नकुल सहदेव के मामा शल्य (जो मजबूरी में कौरवों के पक्ष में युद्ध कर रहे थे और कर्ण के सारथी की भूमिका निभा रहे थे ) लगातार कर्ण को हतोत्साहित कर रहे थे । शल्य कह रहे थे अर्जुन बहुत बड़ा योद्धा है उसका मुक़ाबला करना तुम्हारे वश की बात नहीं । शल्य ने लगातार कर्ण को हतोत्साहित किया और नतीजा ये हुआ कि कर्ण अपनी क्षमता के अनुरूप युद्ध नहीं कर पाए । इसे शल्य ग्रहण कह सकते हैं ।
हमारे जीवन में भी कुछ लोग शल्य की भूमिका निभाते हुए हमें लगातार हतोत्साहित करते हैं । आप शल्य से बच नहीं सकते एक से बचोगे तो दूसरा तैयार मिलेगा । इससे बचने का एकमात्र उपाय है धैर्य । शल्यग्रहण के दौरान धैर्य धारण करें इससे इसका प्रभाव कम हो जाएगा और कर्तव्यपथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ते रहें ।

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