साफ़ नीयत है आपका ब्रह्मास्त्र

हमारे पहाड़ में एक कहावत है कि अगर ककड़ी (खीरा) में चोर का हाथ लग जाए तो ककड़ी बढ़ने की बजाए सड़ने लगती है ।चोर की ख़राब नीयत में इतनी निगेटिव एनर्जी होती है कि वो एक प्राकृतिक प्रक्रिया (ककड़ी का बढ़ना) तक को उल्टा कर देती है । इसी प्रकार साफ़ नीयत में अपार पॉज़िटिव एनर्जी होती है जो प्रतिकूलतम परिस्थिति में भी अनूकूलतम परिणाम देने में सक्षम होती है । किसी भी काम में आपको सफल होने के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण कारक होते है पहला काम को लेकर आपकी समझ साफ़ होनी चाहिए और आपकी नीयत साफ़ होनी चाहिए फिर रास्ते अपने आप बनते चले जाएँगे और कार्य सिद्ध होकर रहेगा । साफ़ नीयत इंसान की स्वीकार्यता बहुत ज़्यादा होती है और उसकी उपस्थिति मात्र से पूरी टीम पॉज़िटिव एनर्जी से ओत प्रोत हो जाती है बड़ी से बड़ी समस्या भी मामूली लगने लगती है और मनचाहे अभीष्ट की सहज प्राप्ति हो जाती है ।
सनद रहे कि कार्य की सफ़लता का पहला कारक कार्य की गहरी समझ ही है आपकी साफ़ नीयत उत्प्रेरक का कार्य करती है । एक बार जंगल में सत्ता परिवर्तन की लहर चली । सभी जानवरों ने बंदर को जंगल का राजा बना दिया। एक दिन एक ख़रगोश का बच्चा खो गया । ख़रगोश जंगल के राजा बंदर के पास अपनी फ़रियाद लेकर गया । ख़रगोश की समस्या सुनकर बंदर एक डाल से दूसरी डाल में उछल कूद करने लगा । सुबह से शाम हो गई । रुआँसा ख़रगोश बोला महाराज मेरा बच्चा अभी तक नहीं मिला । बंदर बोला तेरा बच्चा नहीं मिला तो मै क्या करूँ मेरी मेहनत (उछल कूद) में कोई कमी है तो बता।
कार्य की अच्छी समझ और साफ़ नीयत के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं हो सकता।
साफ़ नीयत आपको बड़ी से बड़ी बाधा को पार करने का रास्ता देती है। कार्य की समझ आपका धनुष है और साफ़ नीयत ब्रह्मास्त्र । संसार की कोई भी बाधा इन दोनों के सामने टिक नहीं सकती ।

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