95 प्रतिशत का सिद्धांत

मलखान सिंह एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के मार्केटिंग विभाग के ज़ोनल मैनेजर हैं । कोरपोरेट जगत में लम्बा समय बिता चुके मलखान हमारे प्रिय मित्र हैं उनके जैसा सहृदय इंसान मैंने कभी नहीं देखा । परोपकारी मलखान सामाजिक कार्यों में बेहद सक्रिय रहते हैं । बैल बुद्धि रोह्ताश भी उनकी बहुत इज्जत करता है ।
अनुभवी मलखान बताते हैं कि जब भी कोई चुनौतीपूर्ण काम की ज़िम्मेदारी आपको दी जाती है तो कभी भी सौ प्रतिशत काम नहीं करना चाहिए । केवल 95 प्रतिशत काम करना चाहिए । ढ़ाई प्रतिशत सीनियर के लिए और ढ़ाई प्रतिशत जूनियर के लिए छोड़ देना चाहिए । ये उनका हिस्सा है इसे वैसे ही छोड़ देना चाहिए जैसे खाना खाते समय गाय का हिस्सा छोड़ दिया जाता है । इससे जूनियर और सीनियर्स दोनों को आपकी क्षमता का भान रहेगा । अगर आप किसी भी काम को सौ प्रतिशत पूरा कर दोगे तो जूनियर और सीनियर दोनों को लगेगा ये तो मामूली काम था कोई भी कर सकता था । ये मनोविज्ञान है जो भी चीज़ बिना मेहनत के आसानी से मिल जाती है उसकी कोई क़ीमत नहीं होती ।
मलखान बताते हैं जब कोई उनसे उनकी कम्पनी का कोई प्रोडक्ट माँगता है तो वे उसे तुरंत नहीं देते चाहे उनके घर में एक्स्ट्रा पड़ा हो वे कहते हैं बहुत मुश्किल है फिर भी आपके लिए अरेंज करूँगा फिर दो दिन बाद घर से ही एक्स्ट्रा प्रोडक्ट दे देते हैं । अगर तुरंत उपलब्ध करा देते तो लेने वाला उसकी क़ीमत नहीं समझता ।
मलखान कहते हैं उन्होंने एसे कई प्रतिभाशाली लोग देखे हैं जो शत प्रतिशत काम करके जूनियर और सीनियर्स दोनों की नज़रों में निक्कमे माने जाते हैं फलस्वरूप अपनी क्षमता का चौथाई हिस्सा भी उन्हें हासिल नहीं होता ।

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