हम चाहे जितनी भी मेहनत कर लें अगर दिशा सही नहीं होगी तो लक्ष्य की दुर्दशा होना अवश्यम्भावी है । अगर दिशा सही है तो थोड़ी सी मेहनत से भी बड़े परिणाम आ सकते है । फ़िज़िक्स में हमने पढ़ा अगर हम पाँच किलोमीटर चलकर वही पहुँचते हैं जहां से चले थे तो किया गया कार्य शून्य माना जाएगा । ये बड़ा महत्वपूर्ण सूत्र है ।
हयात सिंह और दयाल सहपाठी थे । दोनों ने साथ में स्नातक किया । दयाल ने पारम्परिक तरीक़ा अपनाते हुए एक निजी कम्पनी में नौकरी की और आज एक साधारण पैकेज के साथ गुज़ारा कर रहे हैं । हयात ने स्नातक के बाद फ़्रेंच भाषा सीखी और एक फ़्रेंच कम्पनी में नौकरी कर रहे हैं । हयात का पेकेज दयाल से लगभग दस गुना है जबकि उनकी मेहनत और प्रतिभा में कोई अंतर नहीं ।
अगर युवा निजी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो उन्हें कुछ विदेशी भाषा ज़रूर सीखनी चाहिए क्योंकि अतिरिक्त भाषा आपके करियर में केटालिस्ट का काम करेगी । हिंदी माध्यम वाले छात्रों को अंग्रेज़ी तो ज़रूर सीखनी चाहिए । युवाओं को कुछ दूसरी भाषाएँ जैसे जापानी, फ़्रेंच, जर्मन, कोरियन में से कम से कम एक भाषा सीखकर करियर शुरू करना चाहिए । आप जिस क्षेत्र में भी करियर बनाना चाहते हैं एक अतिरिक्त भाषा आपके करियर में बहुत मददगार होगी ।