अभी बच्चे हो

अगर दूसरों से उम्मीदें बहुत करते हो

अगर दिल की हर बात साझा करते हो

ज़रा सी बात पर आह भरा करते हो 

कोई समझता नहीं ये शिकवा करते हो

ज़रूरी मशविरा ग़ैरों से लिए फिरते हो 

ग़ैर ज़रूरी बातों में वक़्त ज़ाया करते हो

प्रसंशा सुनकर फूल के कुप्पा हुए जाते हो

अपनी निंदा सुनकर बिल्कुल बौरा जाते हो

अगर सुनी सुनाई बातों में कान के कच्चे हो

हे मित्र तुम वाक़ई अभी बहुत छोटे बच्चे हो

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