केशब दा

मैन्युफ़ैक्चरिंग उद्योग में NG (Not Good) शब्द बहुत प्रयोग किया जाता है। डिफ़ेक्टिव पार्ट्स , डिफ़ेक्टिव कार्यप्रणाली इत्यादि के लिए ये शब्द इस्तेमाल होता है । जब भी ये शब्द सुनाई देता है केशब दा बहुत याद आते हैं । केशब दा एक जाने माने NG Receiver हैं उन्हें दुनिया में कुछ भी अच्छा नहीं लगता और उन्हें ये ग़लतफ़हमी भी है कि यदि उनके हाथ में पावर आ गई तो वे सबको सुधार सकते हैं । जब सत्संग में भी जाते हैं तो अच्छी बातों को एसे अलग कर देते हैं जैसे हंस दूध और पानी को अलग कर देता है । अगर एक घंटे के प्रवचन में चाहे एक वाक्य ग़लत बोला गया हो केशब दा को केवल वही वाक्य याद रहेगा बाक़ी प्रवचन का एक शब्द भी उन्हें याद नहीं रहेगा । उन्हें बचपन से अब तक की वो सारी बातें याद हैं जो निगेटिव हैं लेकिन ग़ज़ब की याददास्त वाले केशब दा को अच्छा कुछ भी याद नहीं है । अगर अच्छाई का पहाड़ भी केशब दा के सामने आ जाए तो उसमें भी केशब दा कुछ ना कुछ कमी ज़रूर ढूँढ़ निकालेंगे । एसा लगता है ऊपर वाले ने केशब दा के एंटिना में कुछ गडबड़ कर दी जिससे केशब दा केवल निगेटिव सिग्नल ही पकड़ते हैं  ।

Leave a comment