दबकी जैसा जल नहीं

अजबलाल कभी कभी ग़ज़ब की बात करते हैं । अजबलाल जी का कहना है जिस चीज़ से जीवन चल रहा है वहीं सबसे अधिक महत्वपूर्ण है । अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अजब लाल जी ने एक कवि की कुछ पंक्तियाँ सुनाई-

भाई जैसा बल नहीं

सूरज जैसी जोत

गंगाजल सा जल नहीं

सत्ताभोग सा भोग

अजबलाल जी इस कविता को यथार्थ से परे बताते हैं उनका कहना है कि चाहे भाई कितना भी बलवान हो अकेले मे भाई का बल काम नहीं आएगा और अंधे को सूरज की ज्योति से कोई लाभ नहीं होगा । गंगाजल से ज़्यादा ज़रूरी वह जल है जिसे हम रोज़ पीते हैं ( गाँव में लोग पीने के पानी के लिए एक बर्तन उपयोग करते हैं जिसे दबकी कहते हैं ) और सत्ताभोग से बड़ा अन्नभोग है क्योंकि अन्न के बिना जीवन सम्भव नहीं है । अजबलाल जी इस कविता को दुरुस्त करते हुए कहते हैं –

खुद के बल सा बल नहीं

नयन जोत सी जोत

दबकी जैसा जल नहीं

अन्न भोग सा भोग

नागफनी – अक्षय प्रेरणास्रोत

नागफनी का पौधा विपरीत परिस्थिति में भी हरा भरा रहता है । इसे ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं होती । अगर आप कोई भी पेड़ लगाएँगे तो उन्हें बहुत देखभाल की ज़रूरत होती है । नियमित देखभाल के बाद भी अगर आप सौ पेड़ लगाएँगे और सत्तर भी ठीक से हो जाएँ तो बड़ी बात है लेकिन नागफनी अपने आप में अलग है । इसे देखभाल की ज़रूरत ही नहीं । हमने एसे बहुत लोग देखे होंगे जो अपने बच्चों को हर सुख सुविधा देते हैं उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ते फिर भी बच्चे जीवट नहीं बन पाते । बच्चे शिकायत करते ही मिलेंगे । वहीं कुछ एसे भी होते हैं जिन्हें शिकायत करना आता ही नहीं जैसे नागफ़नी को कोई शिकायत नहीं । एसे लोगों को आप दुर्गम से दुर्गम काम में लगा दीजिए ये उस काम को खिलवाड़ बना लेंगे । इन्हें बड़ी से बड़ी मुसीबत में डाल दीजिए उन्हें मुसीबत हमेशा कम लगेगी । ये आपको कहते मिलेंगे मुश्किल तो है लेकिन ज़्यादा बड़ी नहीं थोड़ी और बड़ी होती तो निपटने में ज़्यादा मज़ा आता । ये है असल नागफनी जो हर परिस्थिति में सही परिणाम देने की क्षमता रखती है वो भी बिना किसी शिकायत के ।

ई आर पी इम्पलीमेंटेसन

कुदरती लाल ई आर पी के महारथी हैं । पिछले कुछ वर्षों में हमारा देश डिजिटलाईजेसन में बहुत तेजी से आगे बढ़ा । जी एस टी लागू होने के बाद तो बिना ई आर पी किसी भी कम्पनी का काम नहीं चल सकता अगर कम्पनी का सालाना टर्नओवर पाँच सौ करोड़ से ऊपर है और ट्रैंज़ैक्शन बीस हज़ार से ज़्यादा हैं तो आई आर पी लगाना ज़रूरी हो जाता है और अब तो ऑडिट ट्रेल भी अनिवार्य हो गया है ।

कुदरती लाल का कहना है जब कोई भी कम्पनी मैन्यूअल सिस्टम से ई आर पी में जाती है तो उसकी लीडरशिप के कॉन्सेप्ट कलीयर होना पहली शर्त है । ई आर पी इम्प्लमेंटेशन कोई हौवा नहीं है । केवल कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है :-

1. ई आर पी का कस्टमाईजेसन ना करें

2. अपने काम करने के तरीक़े को बदले उसे ई आर पी के स्तर पर ले जाएँ

3. जिस प्रॉसेस में दस प्रतिशत से ज़्यादा कस्टमाईजेसन होगा वो कभी सक्सेस नहीं होगी ।ये बात गाँठ बाँध लें ।

4. जो फ़ंक्शनैलिटी ई आर पी में नहीं है उसे मैन्यूअल ही रहने दें । कुदरती लाल जी एक कम्पनी का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कम्पनी में ई आर पी इम्प्लमेंट होते ही फ़रमान जारी किया गया अब सारे काम ई आर पी में होंगे कोई कर्मचारी एक्सेल का उपयोग नहीं करेगा । ये बेहद हास्यास्पद है । अगर आपने एक नई ऑडी कार ली है और आपके पास एक आल्टो भी है तो आप बिज़्नेस मीटिंग में ऑडी से जाएँगे और सब्ज़ी मंडी से सब्ज़ी लेने आल्टो से जाएँगे जबकि आप ऑडी से भी जा सकते थे। इसी तरह आप जो भी काम एक्सेल से करते हैं वे सारे काम ई आर पी से करने की गलती करने से बचें ।

5. ई आर पी इम्प्लमेंट करने में कम्पनी के आई टी विभाग और कंसलटेंट की भूमिका सबसे अहम होती है उनको प्रॉसेस ओनर से पर्याप्त सहयोग मिलना ज़रूरी है ।

6. ग़लतियों पर मंथन ज़रूरी है । जब हम कोई नया काम करते हैं तो ग़लतियाँ भी होती है । गलती होने पर स्वस्थ माहौल में विचार विमर्श करके आगे बढ़े ।

7. आरोप प्रत्यारोप के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए । टॉप मैनज्मेंट को यह बात शुरू में ही स्पष्ट कर देनी चाहिए कि ये टीम वर्क है असफलता के लिए किसी को व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं माना जाएगा सभी लोग निडर होकर इसमें सहयोग करें ।

8.ई आर पी को चार फ़ेज़ में इम्पलिमेंट करें एंट्री फ़ेज़, रिपोर्ट फ़ेज़, कम्प्लाइयन्स फ़ेज़ और अनालिसिस फ़ेज़ । चरणबद्ध काम करें चारों फेज एक साथ ना करें ।

9. विश्वस्त रहें । इसमें नाकामयाबी का एक प्रतिशत भी चान्स नहीं है । याद रखे अगर ई आर पी इम्प्लमेंट करना इतना ही मुश्किल होता तो इस पर करोड़ों रुपए ख़र्च करके इसे कोई भी कम्पनी क्यों ख़रीदेगी । ये काम को आसान करने के लिए है खुद मुसीबत बनने के लिए नहीं ।

10. सबसे महत्वपूर्ण बात है कि मैनज्मेंट को ये बात स्पष्ट होनी चाहिए कि ई आर पी कॉस्ट का पार्ट नहीं है इसलिए इसका रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट केलकुलेट नहीं किया जा सकता । ई आर पी कंट्रोल का पार्ट है ये कम्पनी के कंट्रोल सिस्टम को मजबूत बनाता है इसलिए ई आर पी के आर ओ आई की बात ना की जाए । हम कम्पनी की सेफ़्टी के लिए सिक्योरिटी गार्ड रखते हैं तो उसकी आर ओ आई नहीं निकालते क्योंकि हम जानते हैं ये कंट्रोल का पार्ट है कॉस्ट का नहीं । यही बात ई आर पी के लिए भी लागू होती है ।

प्रशंसा

मै नहीं डरता मौत से प्रलय से तूफ़ान से

मगर काँपती है रूह मेरी प्रशंसा के नाम से

प्रशंसा ज़हर है बचिए इसके विषपान से

नहीं समझे तो दो हाथ धो बैठोगे जान से

निंदा का कालकूट ज़हर भरा होता मान से

इसको पीने वाला जीता बड़े स्वाभिमान से

चापलूस काम निकलवाता है बड़े आराम से

उसका तरकस भरा होता है प्रशंसा के बाण से

डिजिटलाईजेसन की तरफ़ एक और कदम

कोरपोरेट मंत्रालय ने प्राइवट कोंपनियों के लिए भी आई एस आई एन नम्बर अनिवार्य कर दिया है । अभी तक केवल पब्लिक कम्पनियों के लिए आई एस आई एन नम्बर लेना अनिवार्य था । सभी प्राइवट कम्पनियों (छोटी कम्पनियों को छोड़कर) को 30 सितम्बर 2024 तक अब तक इशू क़िए गए शेयरों के लिए आई एस आई एन नम्बर लेना ज़रूरी है । ये सरकार का डिजिटलाईजेसन की तरफ़ एक और कदम है ।

हेकड़ी

टीकम दा की हेकड़ी पूरे इलाक़े में मशहूर है । दूसरों के हर काम में टाँग अड़ाना और हर बात पर अपनी चलाना टीकम दा की ख़ासियत रही है । यहाँ तक की अगर गाँव के मंदिर में भंडारे के लिए सामान की लिस्ट बनती है तो टीकम दा उसमें फिर कुछ ना कुछ तब्दीली ज़रूर करते हैं अगर सबने तय किया कि पचास किलो आलू चाहिए तो टीकम दा या तो पाँच किलो आलू कम करवाएँगे या पाँच किलो बढ़वाएँगे लेकिन लिस्ट में तब्दीली ज़रूर करवाएँगे क्योंकि हर जगह हेकड़ी दिखाना उनका शौक़ है । उम्र बढ़ने के साथ साथ टीकम दा के सिर के बाल कम हो गए, आँखों की रोशनी कम हो गई, मुँह में दाँत भी कम हो गए लेकिन हेकड़ी में कोई कमी नहीं आई । टीकम दा आपकी जय हो । ईश्वर आपको लम्बी उम्र दे ।