हमारे गुरुजी कहा करते थे कि अगर किसी इंसान की प्लानिंग क्षमता देखनी है तो उसके कमरे को देखिए । अगर उसका कमरा बहुत अच्छे से व्यवस्थित रहता है तो समझ लेना एसा व्यक्ति बहुत ही सुलझा हुआ इंसान है और हर काम योजनाबद्ध तरीक़े से ही करेगा । जो इंसान अपना रहने वाला कमरा व्यवस्थित नहीं कर सकता वो वह अपना जीवन व्यवस्थित तरीक़े से नहीं जी सकता । ये कसौटी थोड़ी अटपटी लगती है लेकिन है बिल्कुल सटीक ।
Author: Pushkar Mer
चुनाव आ गया
गरीब की थाली में भी पुलाव आ गया
लगता है शहर में फिर चुनाव आ गया
नेता नदारद थे फिर से दरबार आ गया
चेले चपाटों का मानो सैलाब आ गया
नेताओ को टिकट का तनाव आ गया
जनता से दिखावे का लगाव आ गया
हर नेता कमर कस कर आ गया
मदद को पार्टी का लश्कर आ गया
जनता का गला काटने नश्तर आ गया
टिकट की दौड़ में भी तस्कर आ गया
रैतखान-कोदल
हिमालय की गोद में बसे रैतख़ान-कोदल उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले के रामगढ़ क्षेत्र में स्थित बहुत ही रमणीय स्थल है । यहाँ से मीलों फैले पर्वतराज हिमालय के दर्शन होते है। यहाँ पर्यटकों के आने जाने के लिए यातायात की सुविधा नहीं है और यही कारण है कि इस क्षेत्र की प्राकृतिक़ सुंदरता अक्षुण्य बनी हुई है । मै दावे से कह सकता हूँ जो भी पर्यटक प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य को देखना चाहते हैं एक बार इस स्थान पर जाएँ उन्हें छः महीने मेडिटेशन करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी । यहाँ जाने के लिए आपको मोटरमार्ग से गागर जाना पड़ेगा । गागर कठगोदाम रेलवे स्टेशन से 40 किलोमीटर की दूरी पर है । गागर से पैदल मार्ग से आधा किलोमीटर की दूरी पर सिद्ध मंदिर स्थित है । यहाँ पर आलोकिक शांति का अनुभव होता है । यहाँ से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है रैतख़ान । रैतख़ान से 2 किलोमीटर नीचे कोदल बसा है । रैतख़ान-कोदल के सेब के बाग पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं । अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो एक बार रैतख़ान – कोदल का भ्रमण अवश्य करें आपको प्रकृति अपार सुकून से सराबोर कर देगी । रामगढ़ हमेशा से प्रकृति प्रेमियों का आकर्षण रहा है । यहाँ गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर का बंगला था । उन्होंने गीतांजलि की आंशिक रचना रामगढ़ से ही लिखी थी जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था । यहाँ महादेवी वर्मा का बंगला भी स्थित है । आप जब भी नैनीताल यात्रा पर आएँ एक बार रामगढ़ मुक्तेश्वर अवश्य आएँ और पक्षियों के कलरव भरे प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित रैतख़ान-कोदल भ्रमण करें आप अपना सारा तनाव भूलकर तरोताज़ा हो जाएँगे
मेकर चैकर
किसी भी संस्थान में काम करने के लिए नीतियाँ बनाई जाती है । नीतियों के अनुपालन के लिए अलग अलग एस ओ पी बनाई जाती हैं । अलग अलग संस्थानों की काम करने की नीतियाँ अलग अलग होती है लेकिन हर संस्थान में एक प्रॉसेस कॉमन होता है मेकर चैकर । जो भी व्यक्ति काम करेगा उसका सीनियर उसके काम को चैक करेगा । कोई भी कर्मचारी खुद के काम को चैक नहीं करेगा कोई दूसरा कर्मचारी चैक करेगा क्योंकि खुद के काम में कमियाँ दिखाई नहीं देती हैं ।
प्रकृति ने भी हर प्राणी को मेकर चैकर सिस्टम उपहार में दिया है । कान मेकर हैं और आँखे चैकर । सभी प्राणियों को कान और आँखे दी गई हैं । साँप के कान नहीं होते वो आँखों से सुनता है इसीलिए साँप को चक्षुश्रवा कहा जाता है । प्रकृति कहती है जो भी कानों ने सुना उसे आँखों से चैक किए बिना सच नहीं मानना चाहिए । कानों ने अपना काम कर दिया अब आँखों को अपना काम करने दीजिए ।
Penalty for wrong e-way bill
The Allahabad High Court in the case of M/S. Hindustan Herbal Cosmetics vs. State Of U.P. And 2 Others vide Order No. Writ Tax No. – 1400 of 2019 dated 02.01.2024, has held that Penalty is not imposable where wrong vehicle number was mentioned in the e-way bill as it was merely a typographical error.
वर्चूअल नज़रबट्टू
खुराफ़ाती लाल बचपन से ही बहुत ख़ुराफ़ाती हैं । स्कूल के दिनों में इंटर्वल के टाइम साथ के बच्चों के साथ नदी में नहाने जाते थे । खुद जल्दी नहाकर आ जाते थे और बच्चों की शिकायत करके उन्हें टीचर से पिटवाते थे । कल बड़े दिनों के बाद उनसे मुलाक़ात हुई । रहमत भाई ने कहा आजकल शोशल मीडिया में बहुत ऐक्टिव रहते हो । खुराफ़ाती लाल ने ठहाका लगाया – भाई अपना कॉन्सेप्ट क्लीयर है – शोशल मीडिया हाथी के दाँत हैं खाने के और दिखाने के और । इसलिए शोशल मीडिया में जितनी ग़ैर ज़रूरी चीजें हैं वो डालनी चाहिए और अपनी असली योजनाओं की भनक भी शोशल मीडिया से दूर रखनी चाहिए । खुराफ़ाती लाल की शोशल मीडिया की सारी ऐक्टिविटी एक वर्चूअल नज़रबट्टू है जो उन्हें ऐक्चूअल कामों में फ़ोकस करने में मदद करती है । हमने खुराफ़ाती लाल और उनके दिमाग़ को सलाम किया और घर की राह पकड़ी
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अभी बच्चे हो
अगर दूसरों से उम्मीदें बहुत करते हो
अगर दिल की हर बात साझा करते हो
ज़रा सी बात पर आह भरा करते हो
कोई समझता नहीं ये शिकवा करते हो
ज़रूरी मशविरा ग़ैरों से लिए फिरते हो
ग़ैर ज़रूरी बातों में वक़्त ज़ाया करते हो
प्रसंशा सुनकर फूल के कुप्पा हुए जाते हो
अपनी निंदा सुनकर बिल्कुल बौरा जाते हो
अगर सुनी सुनाई बातों में कान के कच्चे हो
हे मित्र तुम वाक़ई अभी बहुत छोटे बच्चे हो
प्याज़ भी खाओ और डंडे भी
एक बार की बात है एक लड़के ने दावा किया कि वह एक समय में बीस प्याज़ खा सकता है । फिर शर्त लग गई अगर लड़का बीस प्याज खाएगा तो उसे बीस हज़ार रुपए का इनाम दिया जाएगा और अगर नहीं खा पाएगा तो उसे बीस डंडे मारे जाएँगे । लड़के ने शर्त मान ली । लड़के ने प्याज़ खाने शुरू किए और पंद्रह प्याज़ खा लिए । अब उसके लिए और प्याज़ खाना मुश्किल हो गया । जैसे तैसे दो तीन प्याज़ और खाकर उसने हार मान ली। कुल मिलाकर अठारह प्याज़ खाने के बाद उसे बीस डंडे मारे ग़ए।
इस कहानी से ये शिक्षा मिलती है कि अपनी क्षमता से अधिक का वादा करने वाला काम भी ज़्यादा करता है और नुक़सान भी उठाता है।
Self-certification of eBRC
DGFT initiated a tremendous step towards ease of doing business by enhancing digital platform for exporters. Directorate General of Foreign Trade (DGFT) issued Trade Notice 33/2023-24 dated 10th November, 2023.
Pilot Launch: A soft launch of the revamped eBRC system was proposed with effect from 15th November 2023. Starting from given date, each bank will set its cut-off date based on their readiness after completing User Acceptance Testing (UAT).
To improve trade facilitation for exporters, DGFT has implemented an enhanced electronic Bank Realisation Certificate (eBRC) system. This more streamlined process is based on electronic Inward Remittance Messages (IRMs) to be transmitted directly by banks to DGFT. Based on the IRMs received, the exporters shall self-certify their eBRCs.
The enhanced eBRC system shall enable exporters to reduce transaction time and costs. It would also ease the burden on bankers by simplifying the reconciliation of IRMs with shipping bills, SOFTEX, invoices, etc. and promote ease of doing business in general.
Exporters can use this facility given by DGFT for the following activities:
- View the IRMs/ORMs reported by the banks
- Generate eBRC (self-certification) from IRMs
- Cancellation of eBRC (if wrongly generated)
- Utilization of report for the IRMs
Exporters may contact the DGFT Helpdesk for eBRC-related issues, suggestions, or feedback through the following channels –
- Call the Toll-Free Helpdesk Support Number.
- Raise a Helpdesk ticket by navigating to DGFT website — > Services — > DGFT Helpdesk Service. Users may also track their earlier helpdesk ticket status or search previously filed helpdesk tickets.
The revamped eBRC system’s user guide and Frequently Asked Questions (FAQs) will be available on the DGFT Website under the Learn Section. Additionally, DGFT will organize Exporter Outreach Programs to demonstrate and raise awareness about the revamped eBRC facility.
टपकी मिलो यतुके हो
जीवन में हास्य के महत्व को कौन नहीं जानता । रामलीला में हास्य कलाकार चार चाँद लगा देते हैं । बचपन में खड़क दा रामलीला में गाते थे – राम जी की शादी भई तुम ले भया हम ले हो । दाव मिलो भात मिलो टपकी मिलों यतुके हो ( राम जी की शादी में आप भी आए और हम भी, दाल भात तो जमकर मिला लेकिन टपकी ( स्वाद बढ़ाने के लिए दी जाने वाली सब्ज़ी थोड़ी सी ही मिली) । जाने माने हास्य कलाकार हरिनंदन दुर्गापाल जी सीता के स्वयंबर में गाते थे – जनक तुम क्या कर बैठे कोल, इस धनुष को वो तोड़ेगा जो भात खाए एक तौल ( इस धनुष को तो कोई पहलवान ही तोड़ सकता है जो एक तोल ( चावल बनाने वाला बड़ा बर्तन जिसमें शादी में भोजन बनता है) चावल खाता हो) । हास्य सम्राट मदन चाचा (सेठ जी) कहते थे – हमर जीतू भौते होशियार हेगो , पोरि बेर छः में पढ़ छी अली बेर पाँच में ले गो ( हमारा जीतू बड़ा होशियार हो गया है पिछले साल छः में पढ़ता था इस साल पाँच में चला गया है) । रामू करा क भैंस ब्ये रो दूध दिन पड़ोल के बेर खाव में भै रो ( राम सिंह की भैंस ब्याई है दूध ना देना पड़े इसलिए तालाब में बैठी है)। फिर पूरन भाई का दौर आया उन्होंने अपनी कलाकारी का अलग समाँ बांधा । जीवन में हास्य अमृत समान है इसमें दो राय नहीं ।