आज अनीस भाई ने एक शानदार पार्टी रखी जिसमें उनके कुछ ख़ास जिगरी मित्र शामिल हुए । अनीस भाई पिछले लगभग अठारह सालों से शराब का नियमित सेवन कर रहे हैं । हफ़्ते में तीन दिन पीनी है तो पीनी है । जाड़ा, गर्मी , बरसात चाहे जो भी मौसम हो अनीस भाई ने कभी नागा नहीं किया । आज तक उन्होंने एक हज़ार लीटर शराब पी ली है और इसी महान उपलब्धि में एक शानदार पार्टी चल रही है । हालाँकि मेरा मदिरा से दूर तक कोई नाता नहीं है लेकिन मेरे अजीज मित्र अनीस भाई ने मुझे पार्टी में बुलाया था तो नहीं जाने का सवाल ही नहीं था । मैंने पूछा अनीस भाई आपको पता कैसे चला कि आपके हज़ार लीटर पूरे हो गए । अनीस भाई ने बताया । एक हफ़्ते में तीन दिन 350 ml यानि हफ़्ते में 1.05 लीटर साल में 52 हफ़्ते यानि 54.6 लीटर 18 साल में 982.8 लीटर । 19वे साल में सारा हिसाब डायरी में लिखा है और इस हिसाब से आज 1000 लीटर का माइलस्टोन पूरा किया ।
मैंने कहा रामलीला में मारीच और सुबाहू कुछ कनस्तर शराब पीने को बड़ी उपलब्धि मानते थे और ज़ोर ज़ोर से गाना गाकर बताते थे लेकिन अनीस भाई कई ड्रम पी गए और किसी को पता भी नहीं चला । वामिक भाई की सादगी को सलाम ।
Author: Pushkar Mer
चौधरी
एक लड़का बिच्छुओं पर शोध कर रहा था । वह लड़का इतना पारंगत हो गया था कि सांकेतिक भाषा में किसी बिच्छु से भी बात कर सकता था ।
पास में एक बिच्छु का दल चला जा रहा था । उस लड़के ने एक बिच्छु से पूछा – मुझे बिच्छुओं के बारे में कुछ जानकारी हासिल करनी है । मै तुम्हारे चौधरी साहब से बात करना चाहता हूँ । तुम्हारा चौधरी कौन है ? बिच्छु ने जवाब दिया – किसी को भी हाथ लगाकर देख ले , यहाँ तो सभी चौधरी हैं ।
आजकल अगर आप किसी काम को लीड करोगे तो आपको काम करने वाले कम और सलाह देने वाले ज़्यादा मिलेंगे । आपको एक से बढ़कर एक शानदार तरीक़े बताये जाएँगे । प्रेज़ेंटेशन का जमाना है चौधरियों से सावधान रहें ।
बैगन की नौकरी
एक बार अकबर बादशाह ने सभी दरबारियों से कहा आज मै तुम्हें बैगन की सब्ज़ी खिलाऊँगा । सभी को भोजन दिया गया बैगन की सब्ज़ी बिल्कुल बेस्वाद थी लेकिन सभी दरबारी जैसे तैसे बैगन की सब्ज़ी खा गये।
अकबर ने बीरबल से पूछा बैगन की सब्ज़ी कैसी लगी ? बीरबल ने कहा बैग़न की सब्ज़ी बेहद लज़ीज़ थी मज़ा आ गया । अकबर के जाने के बाद दरबारियों ने बीरबल से पूछा बैगन की सब्ज़ी बेहद बेस्वाद थी तुमने उसे बेहद लज़ीज़ क्यों बताया । बीरबल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया – मैं बादशाह की नौकरी कर रहा हूँ बैगन की नहीं । मैं वही बोलूँगा जो बादशाह को अच्छा लगेगा।
आप अक्सर एसे लोगों को देख सकते है जो सही ग़लत के हिसाब से नहीं बोलते बल्कि अपने फ़ायदे के हिसाब से बोलते हैं । आज के समय में सही को सही कहने की भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है ।
समुद्र मंथन के संदेश
समुद्र में विभिन्न प्रकार के रत्न पाए जाते हैं इसीलिए इसका एक नाम रत्नाकर भी है । देवताओं और असुरों ने वासुकि नाग की रस्सी बनाकर समुद्र मंथन किया था जिसमें कई दुर्लभ रत्न मिले । ध्यान देने योग्य बात है कि देवताओं ने वासुकि की पूँछ वाला हिस्सा पकड़ा जबकि मूर्ख असुरों ने मुँह वाला हिस्सा पकड़ा जिससे विष के प्रभाव के कारण कई असुर मारे गए । समुद्र मंथन से निकले हलाहल को पीने के लिए भोलेनाथ को बुलाया गया जबकि अमृत पूँछ पकड़ने वाले देवताओं के हिस्से में आया और समुद्र मंथन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले असुरों के हिस्से में मदिरा आई ।
समुद्रमंथन से हमें यही शिक्षा मिलती है कि जो वास्तविक काम करेगा उसे कुछ हासिल नहीं होगा, चालाक लोग काम के समय पीछे और काम का ईनाम मिलते समय आगे रहेंगे । जो भोला भाला होगा उसके हिस्से में सदा विष ही आएगा ।
समुद्र मंथन की कथा आज भी प्रासंगिक हैं अगर आप ज़रूरत से ज़्यादा प्रयास कर रहे हैं तो एक बार ध्यान से अवलोकन करें कि गलती से किसी कुटिल के अमृतपान का इंतज़ाम तो नहीं कर रहे हैं । कड़ी मेहनत अवश्य करें लेकिन पर्याप्त सावधानी भी बरतें ।
बैकग्राउंड मतलब माँ बाप
मेरा एक बहुत ही घनिष्ठ मित्र एक मंत्री जी का भतीजा है और अक्सर अपने चाचा का रौब ग़ालिब करता है और गर्व से कहता है मेरा बैकग्राउंड बहुत सॉलिड है मेरे चाचा बहुत बड़े नेता हैं । उसकी बात सुनकर अपनी हँसी रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि उसे इतनी सी बात नहीं मालूम कि बैकग्राउंड मतलब माँ बाप ।
भाई, बहन, चाचा, ताऊ, यार, दोस्त कोई आपका बैकग्राउंड नहीं हैं । ये आपके शुभ चिंतक हैं और एक सीमा तक मददगार भी । ये आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए आपके सहायक भी हैं । इस दुनिया में भाई जैसा कोई सहायक नहीं इसीलिए बुजुर्गों ने कहा है भाई चाहे बैरी ही क्यों ना हो उससे कोई बात छुपानी नहीं चाहिए ।
अर्थशास्त्र का एक सिद्धान्त है कि संसाधनों के अभाव का सिद्धान्त । आपके संसाधन हमेशा आपकी ज़रूरत से कम होंगे । जैसे जैसे आपकी आमदनी बढ़ेगी वैसे वैसे आपकी ज़रूरतें भी बढ़ जाएगी । व्यक्ति चाहे जितना अमीर हो उसके संसाधन खुद के बच्चों की ज़रूरत के लिए कम पड़ जाते हैं । अपने बच्चों के अलावा वह चाहकर भी एक सीमा से अधिक किसी की मदद नहीं कर सकता ।अर्थशास्त्र का यह नियम सार्वभौमिक है इसका कोई अपवाद नहीं। मुकेश अम्बानी और अनिल अम्बानी परिवार इसका जीवंत उदाहरण है । भाई जब भाई की मदद करता है उसकी एक सीमा होती है लेकिन जब अपने बच्चों की मदद करता है तो कोई सीमा नहीं होती अपनी क्षमता से अधिक झोंक दिया जाता है । मैं आप या कोई और इसका अपवाद नहीं हर इंसान अपनी जिम्मदारियों से जकड़ा हुआ है ।
माँ बाप के सभी संसाधन आपके हैं इसलिए केवल माँ बाप ही आपका बैकग्राउंड हैं । माँ बाप अपने बच्चों के लिए अपनी क्षमता से अधिक मदद करने को तत्पर रहते हैं । इसीलिए माँ बाप को भगवान का दर्जा दिया गया है ।
नास्तिक
मेरा एक मित्र जो एक बहुत सम्पन्न परिवार से ताल्लुक़ रखता है कई वर्षों बाद मिला। पढ़ाई लिखाई में बेहद प्रतिभाशाली मेरे मित्र ने जो दौलत और शोहरत हासिल की उसे देखकर मन प्रफुल्लित हुआ। हम बातों में मशगूल थे तभी बातों बातों में धर्म की चर्चा छिड़ गई । मित्र बोला मैं कट्टर नास्तिक हूँ मैं किसी धर्म या ईश्वर को नहीं मानता । ये बात मुझे बेहद नागवार गुज़री, हालाँकि मैंने कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं समझा । जब सालों बाद किसी अभिन्न मित्र से मुलाक़ात हो तो उसमें बहस बाज़ी का कोई स्थान नहीं रहता ।
जब मैं घर पहुँचा तो मित्र की बात याद करके मेरी हँसी नहीं रुक रही थी । आप केवल इसलिए नास्तिक नहीं हो सकते कि आप किसी धर्म या ईश्वर में विश्वास नहीं करते, आप नास्तिक तब होते हो जब आप अपने आप में विश्वास नहीं करते।
मनुष्य जीवन ईश्वर की अमूल्य देन है । अपने पर विश्वास करने वाला आस्तिक और अपने पर विश्वास ना करने वाला नास्तिक होता है ।
परमपिता परमात्मा की सत्ता को आपके विश्वास करने ना करने से क्या फ़र्क़ पड़ जाएगा । ये समस्त सृष्टि ईश्वर की सत्ता और उसकी स्थापित व्यवस्था द्वारा संचालित है । ईश्वर की सत्ता लोकतांत्रिक नहीं है । ईश्वर को सत्ता में बने रहने के लिए आपके मत की आवश्यकता नहीं है। परम सत्ता चिर स्थाई है इसमें पाँच साल में चुनाव का कोई प्रावधान नहीं है । आप अपना मत अपने पास संभाल कर रखिए क्योंकि आपको मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर नहीं मिलने वाला ।
संसार में सब कुछ परम सत्ता के अधीन है । कर्मफल की एसी शानदार व्यवस्था भला कौन कर सकता है । अरबों खरबो जीव सृष्टि में और सारी जीवन दायिनी ज़रूरत की व्यवस्था प्रकृति ने मुफ्त में कर रखी है । ग़लत काम करने वालों की देर सवेर दंड मिलता है । अच्छे काम करने वालों को उनके कामों का सुफल मिलता है, क्या एसी व्यवस्था ईश्वर के अलावा कोई और कर सकता है ।
संघर्ष
रसिक लाल आज अपने संघर्ष की कहानी सुना रहे थे कि उन्होंने छात्र जीवन में बड़ा संघर्ष किया 10 किलोमीटर चलकर स्कूल जाते थे रास्ते में नदी पड़ती थी उसे तैरकर पार करते थे । घर में ग़रीबी थी मेहनत मजदूरी भी करते थे । पढ़ाई पूरी करके रोज़गार के लिए बड़े धक्के खाए । रसिक लाल आज पूरे रंग में थे और अपनी संघर्ष गाथा धाराप्रवाह सुना रहे थे तभी वहाँ अंगूर के दामाद अनीस भाई (शराब (अंगूर की बेटी) के नियमित सेवन के कारण अनीस भाई को अंगूर का दामाद कहा जाता है ) वहाँ पहुँचे और उन्होंने रसिक लाल की संघर्ष गाथा में रंग में भंग डाल दिया ।
चार पेग लगाने के बाद परम अवस्था को प्राप्त अनीस भाई रसिक लाल पर बरस पड़े और आँखे ततेर कर बोले – रसिक लाल तुम इन छोटी मोटी बातों को संघर्ष कहते हो इसका मतलब तुम्हें संघर्ष के मायने ही नहीं पता ।
तुम दस किलोमीटर चलकर स्कूल जाते थे इसमें संघर्ष जैसा कुछ भी नहीं क्या तुम सोचते हो कि स्कूल चलकर तुम्हारे घर आता । ईश्वर ने पैर तुम्हें दिए तो चलकर तुम ही जाओगे । रास्ते में नदी पड़ती थी उसे रोज़ तैर कर जाते थे तो भी तुमने किसी तैराकी प्रतियोगिता में कोई मेडल नहीं जीता लानत है एसी तैराकी पर । तुम्हारे जमाने में रोज़गार की कोई कमी नहीं थी फिर भी तुम्हें धक्के खाने पड़े जिससे पता चलता है कि तुम कितने बड़े जड़ बुद्धि थे ।
रसिक लाल को अनीस भाई की बात नागवार गुजरी और दोनों में कहा सुनी शुरू हो गई । तभी देवयोग से वहाँ केटालिंक डीग़र दा पहुँच गए और लड़ाई को आगे बढ़ाने को अपना पूरा अनुभव झोंक दिया और कहासुनी को हाथापाई में तब्दील करवा के ही दम लिया ।
आज रसिक लाल और अनीस भाई दोनों अस्पताल में भर्ती हैं और डीग़र दा दोनों की तीमारदारी में मशगूल हैं ।
झिमोड़ी का
प्रताप सिंह अब काफ़ी बुजुर्ग हो चुके हैं । छात्र जीवन में वे बड़े बिगड़ैल टाइप छात्र नेता थे बात बाद में करते थे उनका हाथ पहले उठता था । उनकी दबंगई के कारण उन्हें झिमोड़ दा के उपनाम से जाना जाता था । उम्र बढ़ने के साथ झिमोड़ दा को झिमोड़ी का कहा जाने लगा । झिमोड़ ततैया टाइप होता है । अगर आँख के आस पास काटे तो आँखे सूज जाती है । अक्सर पहाड़ में घास काटते समय झिमोड से आमना सामना होता है । हमारे चाचा मदन सेठ जी रामलीला में एक गाना गाते थे – ब्वारिक ख़्वारा में किलिप चमकनी सासू का ख़्वारा ने झिमोड रमक़नी (मतलब – बहू के सिर में तो नए जमाने की हेयर क्लिप चमक रहे हैं जबकि घास काटती सास के सिर में झिमोड़ अटैक कर रहे हैं )।
झिमोड़ी का अपने छात्र जीवन के क़िस्से सुनाते समय पहाड़ के अधिकतर बुजुर्गों की तरह अपने संघर्ष की गाथा को बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं लेकिन राजनीति के चतुर सुजान झिमोड़ी का आज भी बड़े बड़े राजनैतिक विश्लेषकों को मात देने का माद्दा रखते हैं । उनका चुनावी पूर्वानुमान बड़ा सटीक होता है ।
लापरवाही का काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट
हाल ही में एक दिन लखनऊ के एक पुराने साथी भौमिक भाई से मुलाक़ात हो गई थी । मै खुद को बड़ा जहनसीब मानता हूँ कि मेरा राब्ता भौमिक भाई जैसे लोगों से रहा है जिन्हें परवरदीगार ने मुस्तकिल सोच इनायत बख्शी है । भौमिक भाई जीवन के उतार चढ़ाव पर निहायत जुदा मशविरा देते हैं ।
हम कॉफ़ी हाउस में बैठे गुफ़्तग़ू में मशगूल थे तभी चक्रवृद्धि व्याज का ज़िक्र आया । मैंने कहा विद्वानों ने काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट को दुनिया का आठवाँ अजूबा कहा है । फ़क़ीरी मिज़ाज वाले भौमिक भाई बोले – सभी लोग काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट के करिश्माई नुस्ख़े की बात करते हैं जबकि ये फ़क़त फ़ायदा नहीं करता उतना ही नुक़सान भी करता है । अपनी बात की नज़ीर पेश करते हुए भौमिक भाई मुख़ातिब हुए – हमारा बड़ा हुआ पेट एक दिन में नहीं बड़ता ये छोटी छोटी लापरवाही का काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट है । हमारा लीवर एक दिन में खराब नहीं होता । शरीर की ज़्यादातर व्याधियाँ हमारी लापरवाही का काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट है । जो बच्चे नियमित पढ़ाई करते हैं काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट के कारण हमेशा अव्वल रहते हैं जो बच्चे महज परीक्षा के दौरान पढ़ाई करते हैं हमेशा पीछे रहते हैं क्योंकि वे नियमित पढ़ाई से होने वाले काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट से मरहूम रह जाते हैं । अगर हम छोटी छोटी लापरवाही के काम्पाउंडिंग इम्पैक्ट को विज्वलाइज कर पाएँगे तो बड़े नुक़सान से बच पाएँगे ।
नींद ने छीने सपने
वैसे तो नींद में बड़े सपने आते हैं लेकिन असल में नीद कई सपने तोड़ती है । मान लिया कोई प्रतिभाशाली बच्चा प्रातः काल चार बजे का अलार्म लगाकर सोता है लेकिन सुबह आलस में अलार्म बंद करके फिर सो जाता है मीठे सपनों में खो जाता है तो वह अलार्म बंद नहीं करता बल्कि अपनी तक़दीर बंद कर देता है । बच्चे को लगता है एक दिन पढ़ाई नहीं करने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा लेकिन धीरे धीरे ये लापरवाही बहुत महँगी साबित होती है । सुखार्थिनः कुतो विद्या विद्यार्थिनः कुतो सुख़म । सुख चाहने वाले को विद्या नहीं मिलती और विद्या चाहने वाले को सुख नहीं । जो बच्चा सुबह उठने में आलस ना करे चाहे औसत दर्जे का हो उसे कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता ।