बचत का फंडा

हम सभी अपनी भविष्य के लिए वित्तीय योजनाएँ बनाते हैं। आजकल निम्नलिखित योजनाएँ बहुत लोकप्रिय हैं-

  1. पी.पी. एफ. – ये एक परम्परागत बचत खाता है। आप एस.बी. आइ. , पी.एन. बी. पोस्ट ऑफ़िस या किसी भी अधिकृत बैंक में यह खाता खुलवा सकते हैं। जितनी कम उम्र में ये खाता खोला जाएगा उतना अधिक लाभ होगा। साल में कम से कम ५०० रुपये जमा करना अनिवार्य होता है। यदि २५ साल कि उम्र में ये खाता खोला जाए हर साल डेढ़ लाख जमा किया जाए तो पचास साल की उम्र में आपको एक करोड़ रुपया मिलेगा । इस पर इंकम टैक्स भी नहीं देना पड़ेगा। पी पी एफ में किया गया निवेश राशि का इंकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स बचत लाभ भी मिलता है। इसमें निवेश के समय भी आयकर की छूट मिलती है और निकासी पर ब्याजसहित मिली एकमुश्त राशि भी आयकर से मुक्त होती है।
    २. एनपीएस – ये एक रेटायरमेंट प्लान है। यदि आप ३० साल की उम्र से ४ हज़ार प्रतिमाह एन पी एस खाते में जमा करते हैं और यदि रिटर्न 9 प्रतिशत रहता है ६० साल की उम्र में आपको 44 लाख रुपया एकमुश्त मिलेगा और 15 हज़ार रुपया प्रतिमाह पेन्शन आजीवन मिलेगी। एन पी एस बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं लेकिन भारत एक उभरती अर्थव्यवस्था है इसलिए एन पी एस बहुत ही शानदार प्रोडक्ट है। एन पी एस निवेश से आय कर में पचास हज़ार की अतिरिक्त छूट मिलती है।
    ३. इक्विटी- अगर आपको equity की बहुत अच्छी जानकारी है तो ही आपको इसमें निवेश करना चाहिए। equity आपको मालामाल कर सकता है। एसे बहुत से निवेशक हैं जिन्होंने १० साल में अपने पैसे को २० गुना किया है। लेकिन बिना जानकारी के निवेश से बचना चाहिए।
    ४. म्यूचूअल फंड – अगर आपको शेयर मार्केट की ज़्यादा जानकारी नहीं है तो आप म्यूचूअल फंड के माध्यम से शेयर मार्केट में निवेश कर अपनी पूँजी बढ़ा सकते हैं।

नववर्ष में गुणग्राही बनें

इस पूरी दुनिया में एक भी इंसान एसा नहीं है जिसमें कोई बुराई नहीं और एक भी इंसान एसा नहीं जिसमें कोई अच्छाई नहीं । इंसान अच्छाई और बुराई का मिश्रण है । अगर हम गुणग्राही होंगे तो हमें दूसरे लोगों में केवल अच्छाई दिखेगी और अगर हमारा दृष्टिकोण दोषपूर्ण होगा तो हमें दूसरे लोगों में केवल बुराई दिखेगी।
कारनेगी ने बड़ी महत्वपूर्ण बात कही कि सोने की खोज करते समय हमें टनों के हिसाब से मिट्टी हटानी पड़ती है लेकिन हमारी दृष्टि अर्जुन की तरह केवल सोने को खोजने में टिकी रहती है मिट्टी में भी हम सोना खोज निकालते हैं । ठीक इसी प्रकार अगर हम किसी व्यक्ति का मूल्यांकन करने बैठेंगे तो उस व्यक्ति में हमें सैकड़ों कमियाँ (मिट्टी) दिखाई देगी लेकिन हमने उसकी अच्छाई (सोना) ढूँढना चाहिए । इस दुनिया का हर व्यक्ति किसी न किसी चीज़ में हमसे बेहतर है हमें उसका वही गुण खोजकर उससे सीखना चाहिए ।
हर इंसान में कुछ न कुछ सीखने योग्य है इसमें कोई संदेह नहीं । इंसान ईश्वर की देन है और उसकी रचना में कोई खूबी ना हो यह कैसे सम्भव हो सकता है।
आओ नव वर्ष में संकल्प लें अच्छा सोचेंगे अच्छा बोलेंगे और अच्छा देखेंगे। सभी मित्रों को नववर्ष 2024 की अग्रिम शुभकामनाएँ 🙏

जिओ और जीने दो

आ जाए कोई आने दो
चला जाए तो जाने दो
खाने वाले को खाने दो
पकड़ा जाए तो थाने दो
पाने वाले को शक्कर दो
बेवक़ूफ़ों को टक्कर दो
होता है जो हो जाने दो
कहने वालों को कहने दो
खुश रहो ख़ुश रहने दो
जिओ और जीने दो

बलदा की जय हो

एक बार मै अपने एक परिचित विधायक जी के साथ एक मित्र जिनका नाम बालकृष्ण था के घर किसी समारोह में शरीक हुआ । बातों – बातों में विधायक जी ने वहाँ उपस्थित लोगों को बताया की बलदा (बालकृष्ण जी) मेरे सहपाठी थे और बहुत बुद्धिमान थे मै बलदा की नक़ल करके फ़र्स्ट डिविज़न पास हुआ था । सुनने वाले सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए । वापस आते वक्त एक साथी ने विधायक जी से पूछा बलदा खुद थर्ड डिविज़न से पास हुए हैं उनकी नक़ल करके आप फ़र्स्ट डिविज़न कैसे ले आए । विधायक जी ने मुस्कुराते हुए बताया – एसा बोलना पड़ता है भाई, वोट पाना सहज नहीं है । अगर आप अंधे को अंधा बोलोगे तो उसे बुरा लगेगा । गधे को माला पहना देने से वह घोड़ा नहीं बनेगा लेकिन गधे क़ो गधा कहने से वह आपका दुश्मन बन जाएगा ।
लोगों की प्रसंशा कीजिए इससे आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा जो बहुत लाभकारी होता है । सभी मिलकर बोलिए – बलदा की जय 🙏

निरंतरता के दस मिनट

रफ़ीक भाई जर्मन भाषा के मुर्धन्य विद्वान हैं । रफ़ीक मूल रूप से एक टेक्निकल मैनज्मेंट कंसलटेंट हैं । जर्मन भाषा उनकी अतिरिक्त योग्यता है । रफ़ीक भाई बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में एक साल जर्मन भाषा की कोचिंग ली । उसके बाद दस साल स्वाध्याय से इसमें पारंगत हुए । मज़े की बात ये है कि रफ़ीक ने प्रतिदिन केवल दस मिनट पढ़ाई की लेकिन दस साल में एक भी दिन नागा नहीं किया । ना कभी दस मिनट से ज़्यादा पढ़ा ना कम । रफ़ीक भाई का कहना है जब हम एक घंटा या दो घंटा पढ़ते हैं तो कभी कुछ काम आ जाता है कभी त्योहार आ जाता है कभी बच्चों को पढ़ाने बैठ जाते हैं । खुद के लिए निरंतर एक घंटा या अधिक निकालना सम्भव नहीं हो पाता लेकिन दुनिया में कोई भी इतना व्यस्त नहीं कि खुद के लिए दस मिनट ना निकल पाए । दस मिनट में चमत्कार घटित हो सकता है रफ़ीक भाई इसकी मिसाल हैं ।
Moral of the story – Great works are performed not by strength but by perseverance.

95 प्रतिशत का सिद्धांत

मलखान सिंह एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के मार्केटिंग विभाग के ज़ोनल मैनेजर हैं । कोरपोरेट जगत में लम्बा समय बिता चुके मलखान हमारे प्रिय मित्र हैं उनके जैसा सहृदय इंसान मैंने कभी नहीं देखा । परोपकारी मलखान सामाजिक कार्यों में बेहद सक्रिय रहते हैं । बैल बुद्धि रोह्ताश भी उनकी बहुत इज्जत करता है ।
अनुभवी मलखान बताते हैं कि जब भी कोई चुनौतीपूर्ण काम की ज़िम्मेदारी आपको दी जाती है तो कभी भी सौ प्रतिशत काम नहीं करना चाहिए । केवल 95 प्रतिशत काम करना चाहिए । ढ़ाई प्रतिशत सीनियर के लिए और ढ़ाई प्रतिशत जूनियर के लिए छोड़ देना चाहिए । ये उनका हिस्सा है इसे वैसे ही छोड़ देना चाहिए जैसे खाना खाते समय गाय का हिस्सा छोड़ दिया जाता है । इससे जूनियर और सीनियर्स दोनों को आपकी क्षमता का भान रहेगा । अगर आप किसी भी काम को सौ प्रतिशत पूरा कर दोगे तो जूनियर और सीनियर दोनों को लगेगा ये तो मामूली काम था कोई भी कर सकता था । ये मनोविज्ञान है जो भी चीज़ बिना मेहनत के आसानी से मिल जाती है उसकी कोई क़ीमत नहीं होती ।
मलखान बताते हैं जब कोई उनसे उनकी कम्पनी का कोई प्रोडक्ट माँगता है तो वे उसे तुरंत नहीं देते चाहे उनके घर में एक्स्ट्रा पड़ा हो वे कहते हैं बहुत मुश्किल है फिर भी आपके लिए अरेंज करूँगा फिर दो दिन बाद घर से ही एक्स्ट्रा प्रोडक्ट दे देते हैं । अगर तुरंत उपलब्ध करा देते तो लेने वाला उसकी क़ीमत नहीं समझता ।
मलखान कहते हैं उन्होंने एसे कई प्रतिभाशाली लोग देखे हैं जो शत प्रतिशत काम करके जूनियर और सीनियर्स दोनों की नज़रों में निक्कमे माने जाते हैं फलस्वरूप अपनी क्षमता का चौथाई हिस्सा भी उन्हें हासिल नहीं होता ।

एक था नत्थू

बचपन की हर साधारण से साधारण बात उम्र बढ़ने के साथ असाधारण हो जाती है। सभी का बचपन बड़ा निष्पाप, मासूम और नटखट यादों से भरा होता है। मेरा बचपन प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पक्षियों के कलरव भरे आकाश वाले रामगढ़ में बीता जो हमारा प्रैत्रिक गाँव है। रामगढ़ फलों के लिए पूरे उत्तराखंड में मशहूर है। गर्मियों में यहाँ बगीचे आड़ू, प्लम, खूबानी, सेब, नाशपाती आदि फलों से भरे होते हैं। बगीचों में फलों को तोते आदि पक्षियों से ख़तरा रहता है इसलिए चौकीदार खूब हल्ला करते रहते हैं। हमारे बगीचे के ऊपर वाले बगीचे में चौकीदारी करते थे नत्थू जो सुबह से शाम तक लगातार अपनी सुरीली आवाज़ में फ़िल्मी गाने गाते थे। नत्थू को दर्जनों फ़िल्मी गाने ज़ुबानी याद थे। पूरे सीजन लगातार लगभग चार महीने गाने पर कभी नत्थू का गला नहीं बैठा। नत्थू मूल रूप से बहेडी के रहने वाले थे इसलिए उनकी बोली हमसे काफ़ी अलग थी। होली में भी नत्थू समाँ बाँध देते थे – कहाँ रांगे हरे कलेवा कहा रांगे मोरला, का खाँगे हरे कलेवा का खाँगे मोरला ये होली नत्थू बड़े चाव से गाता था। अगर नत्थू को सही प्रशिक्षण मिल गया होता तो नत्थू निश्चित ही बहुत बड़ा फ़नकार होता इसमें कोई संदेह नहीं।

अनीस भाई के हज़ार लीटर

आज अनीस भाई ने एक शानदार पार्टी रखी जिसमें उनके कुछ ख़ास जिगरी मित्र शामिल हुए । अनीस भाई पिछले लगभग अठारह सालों से शराब का नियमित सेवन कर रहे हैं । हफ़्ते में तीन दिन पीनी है तो पीनी है । जाड़ा, गर्मी , बरसात चाहे जो भी मौसम हो अनीस भाई ने कभी नागा नहीं किया । आज तक उन्होंने एक हज़ार लीटर शराब पी ली है और इसी महान उपलब्धि में एक शानदार पार्टी चल रही है । हालाँकि मेरा मदिरा से दूर तक कोई नाता नहीं है लेकिन मेरे अजीज मित्र अनीस भाई ने मुझे पार्टी में बुलाया था तो नहीं जाने का सवाल ही नहीं था । मैंने पूछा अनीस भाई आपको पता कैसे चला कि आपके हज़ार लीटर पूरे हो गए । अनीस भाई ने बताया । एक हफ़्ते में तीन दिन 350 ml यानि हफ़्ते में 1.05 लीटर साल में 52 हफ़्ते यानि 54.6 लीटर 18 साल में 982.8 लीटर । 19वे साल में सारा हिसाब डायरी में लिखा है और इस हिसाब से आज 1000 लीटर का माइलस्टोन पूरा किया ।
मैंने कहा रामलीला में मारीच और सुबाहू कुछ कनस्तर शराब पीने को बड़ी उपलब्धि मानते थे और ज़ोर ज़ोर से गाना गाकर बताते थे लेकिन अनीस भाई कई ड्रम पी गए और किसी को पता भी नहीं चला । वामिक भाई की सादगी को सलाम ।

चौधरी

एक लड़का बिच्छुओं पर शोध कर रहा था । वह लड़का इतना पारंगत हो गया था कि सांकेतिक भाषा में किसी बिच्छु से भी बात कर सकता था ।
पास में एक बिच्छु का दल चला जा रहा था । उस लड़के ने एक बिच्छु से पूछा – मुझे बिच्छुओं के बारे में कुछ जानकारी हासिल करनी है । मै तुम्हारे चौधरी साहब से बात करना चाहता हूँ । तुम्हारा चौधरी कौन है ? बिच्छु ने जवाब दिया – किसी को भी हाथ लगाकर देख ले , यहाँ तो सभी चौधरी हैं ।
आजकल अगर आप किसी काम को लीड करोगे तो आपको काम करने वाले कम और सलाह देने वाले ज़्यादा मिलेंगे । आपको एक से बढ़कर एक शानदार तरीक़े बताये जाएँगे । प्रेज़ेंटेशन का जमाना है चौधरियों से सावधान रहें ।

बैगन की नौकरी

एक बार अकबर बादशाह ने सभी दरबारियों से कहा आज मै तुम्हें बैगन की सब्ज़ी खिलाऊँगा । सभी को भोजन दिया गया बैगन की सब्ज़ी बिल्कुल बेस्वाद थी लेकिन सभी दरबारी जैसे तैसे बैगन की सब्ज़ी खा गये।
अकबर ने बीरबल से पूछा बैगन की सब्ज़ी कैसी लगी ? बीरबल ने कहा बैग़न की सब्ज़ी बेहद लज़ीज़ थी मज़ा आ गया । अकबर के जाने के बाद दरबारियों ने बीरबल से पूछा बैगन की सब्ज़ी बेहद बेस्वाद थी तुमने उसे बेहद लज़ीज़ क्यों बताया । बीरबल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया – मैं बादशाह की नौकरी कर रहा हूँ बैगन की नहीं । मैं वही बोलूँगा जो बादशाह को अच्छा लगेगा।
आप अक्सर एसे लोगों को देख सकते है जो सही ग़लत के हिसाब से नहीं बोलते बल्कि अपने फ़ायदे के हिसाब से बोलते हैं । आज के समय में सही को सही कहने की भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है ।