छोड़ भलाई सारे काम करता हूँ
हर चुनौती अपने नाम करता हूँ
नतीजे तक ना आराम करता हूँ
काम भी सुबह से शाम करता हूँ
ना किसी को भी बदनाम करता हूँ
मतलबी को दूर से सलाम करता हूँ
हरिराम नाई को गुमराह करता हूँ
इसका एलान सर ए राह करता हूँ
दुश्मन से प्रेम का इज़हार करता हूँ
प्रेम ही जीवन है स्वीकार करता हूँ
भलाई करने से ही मै परहेज़ करता हूँ
और किसी काम से ना गुरेज़ करता हूँ
छोड़ भलाई सारे काम करता हूँ
Author: Pushkar Mer
होशियार दा
होशियार दा नाम के अनुरूप बड़े होशियार हैं । उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत अपनों के प्रति उनका मधुर व्यवहार । होशियार दा अपनों के लिए शहद से भी मीठे और परायों के लिए करेले से भी ज्यादा कड़वे हैं । हर काम में सरपंची दिखाते होशियार दा ‘अंधा बाँटे रेवड़ी और अपनों को दे ‘ इस सिद्धांत पर बड़ा गहरा विश्वास रखते हैं । उनके तर्कों के आगे लोमड़ी जैसे शातिर दिमाग़ वाले खडक दा भी पानी भरते हैं । हालाँकि खडक दा पूरे जी जान से टक्कर देने की कोशिश करते हैं लेकिन नैसर्गिक प्रतिभावान होशियार के आगे हमेशा घुटने टेकते नज़र आते हैं । होशियार दा का कहना है वे कड़वा ज़रूर बोलते हैं लेकिन सबका भला चाहते हैं उन्होंने आज तक किसी का बुरा नहीं किया जाने अनजाने कुछ हो गया हो तो लोग उन्हें माफ़ करें । एसा कहते समय एक कुटिल मुस्कान होशियार दा के चेहरे पर फैल जाती है ।
रोहताश
रोहताश एक मेहनतकश शख़्स है । रोहताश को बेबाक़ी के लिए जाने जाना जाता है । घर वालों ने लाख दुनियादारी समझाने की कोशिश की लेकिन रोहताश बैल का बैल ही रहा । बिना लाग लपेट के अपने विचार रखने वाला चाहे दिल से साफ़ हो या ना हो दिमाग़ से साफ़ ज़रूर होता है । रोहताश की दादी ने समझाया कोयल एक बेहद धूर्त पक्षी है जो कौवे को बेवक़ूफ़ बनाती है लेकिन मीठी बोली के कारण कोयल सभी को प्रिय होती है इसलिए हमेशा मीठा बोलना चाहिए । लेकिन रोहताश कहाँ मानने वाला । उसे तो बेबाक़ी पसंद है जो बेहद कड़वी होती है ।
नववर्ष के संकल्प के पूर्वाभ्यास की बेला
आज से छः दिन बाद नव वर्ष 2024 की शुरुआत होगी । हर साल की तरह इस साल भी हम कुछ न कुछ संकल्प लेंगे । अधिकतर नववर्ष के संकल्प (new year resolution) पहले दिन या पहले हफ़्ते में ही दम तोड़ देते हैं । यदि संकल्प आवेश में आकर बिना सोचे समझे लिया जाएगा तो उसका टूटना निश्चित है । यदि आप चाहते हैं कि आपका संकल्प पूरा हो तो आप अपने संकल्प का चुनाव ठीक से करे । कोई भारी भरकम संकल्प लेने से बचे । हल्का फ़ुल्का संकल्प करें फिर उस पर दृढ़ रहे । यदि जीवन में सुधार की तरफ़ बढ़ना है तो नव वर्ष संकल्प बहुत उपयोगी है । हम हर साल छोटे छोटे संकल्प लेकर काफ़ी सुधार कर सकते हैं । अभी छः दिन का समय शेष है इस दौरान हम नववर्ष संकल्प का पूर्वाभ्यास कर सकते है। उदाहरण के लिए जैसे हमने संकल्प लिया नये साल में हम किसी के भी बारे में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं करेंगे तो इसकी पूर्वाभ्यास हम अभी कर सकते हैं।
आपका नव वर्ष संकल्प अवश्य पूरा हो और आप प्रगति पथ पर अग्रसित रहें यही ईश्वर से कामना है 🙏
शुभस्य शीघ्रम
मेरे छोटे मामाजी (गोपाल मामाजी) अक्सर कहा करते थे जिसकी सुबह पिछड़ गई समझो उसका दिन भी पिछड़ गया । अगर एक बार कोई भी काम पूरे मनोयोग से शुरू कर दिया जाए तो वह काम धीरे धीरे पूरा हो ही जाता है । अगर हम काम की शुरुआत करने में देरी करेंगे तो निश्चित ही काम में पिछड़ जाएँगे । परिस्थिति कभी अनुकूल नहीं होती उन्हें अनुकूल बनाना पड़ता है । एक कहावत है अनुकूल परिस्थितियों का इंतज़ार करने वाला हमेशा इंतज़ार ही करता रहता है। सुबह शरीर और मस्तिष्क एकदम तरोताज़ा रहता है इसलिए सुबह का समय किसी भी काम के लिए सबसे उत्तम बताया गया है।
चदरिया झीनी रे झीनी
इंटर कॉलेज में हमारे पढ़ाई के दिनों में मेरे सहपाठी देवेंद्र थापा के बड़े भाई राजेंद्र थापा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कबीरदास जी का भजन गाते थे – चदरिया झीनी रे झीनी । स्वयं ही हारमोनियम बजाते थापा जी ग़ज़ब समाँ बाँध देते थे । इस भजन का एक एक शब्द अनमोल है । कबीर ने शरीर को चादर कहा है । बनाने वाले ने बड़े जतन और बड़े होश से इस शरीर को बनाया है । मूरख लोग इस चादर को मैली कर देते हैं ( अष्ट कमल का चरखा बनाया पाँच तत्व की पूनी , नौ दस मास बुनन को लागे मूरख मैली किन्ही ) लेकिन संत कबीर जैसे जागृत पुरुष इसे बिल्कुल मैली नहीं करते ( दास कबीर ने एसी ओढ़ी ज्यों की त्यों धर दीनी) । कबीर दास जी ने इस भजन में बताया है जीवन एक अभिनय है चाहे मंच कितना बड़ा हो इससे अधिक कुछ नहीं । इससे अधिक माना तो भटके ।
ओजस्वी किशोर दा
किशोर दा पेशे से वास्तुकार हैं । प्रतिभाशाली किशोर दा एक ओजस्वी वक्ता हैं जब बोलते हैं उनकी वाणी से तेज टपकता हैं । किशोर दा की वाणी में तेज का मूल कारण जीभ पर उनका अकल्पनीय संयम है एसा संयम केवल किताबी किरदारों में मिलता है । किशोर दा ने अपने जीवन में निंदा रस से सख़्त परहेज़ किया । सत्तर बसंत देख चुके किशोर दा ने पूरे जीवनकाल में किसी की निंदा में एक शब्द नहीं बोला । जिसका अपनी इंद्रियों में एसा संयम होता है उसका ओजस्वी होना स्वाभाविक है । महाभारत में गांधारी ने अपने नेत्रो में पट्टी बांधकर अद्भुत इंद्रीय संयम साधा था उनकी इस साधना ने इतनी शक्ति अर्जित कर ली थी कि उनकी एक दृष्टिपात ने दुर्योधन के शरीर को वज्र जैसा शक्तिशाली बना दिया था । निंदा रस मन को हल्का करता है निंदा रस का अपना आनंद है लेकिन निंदा रस वाणी के ओज को निस्तेज कर देता है । किशोर दा के कट्टर दुश्मन हैं हयात भाई । लोग मज़े लेने के लिए किशोर दा से जानबूझकर कर हयात का ज़िक्र करके किशोर दा को उकसाते हैं कि किशोर दा हयात के ख़िलाफ़ एक शब्द तो बोल दें लेकिन किशोर दा अलग ही मिट्टी के बने हैं उनके मुँह से कट्टर विरोधी हयात के लिए भी प्रशंसा के फूल ही झरते हैं ।
ट्रेनिंग की महत्ता
हमारे परम मित्र कैलाश दा जिन्हें हम प्यार से कैला बाबू कहते हैं एक कोरपोरेट ट्रेनर हैं । आज लम्बे अंतराल के बाद उनसे मुलाक़ात हुई । कैला बाबू ने ट्रेनिंग की महत्ता समझाई । बक़ौल कैला बाबू आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में वही कम्पनी कामयाब रहेगी जो अपने कर्मचारियों की ट्रेनिंग की पर्याप्त व्यवस्था करेगी । जो लीडिंग ऑर्गनायज़ेशन हैं उन्होंने कर्मचारियों की ट्रेनिंग अनिवार्य कर रखी है कई एसे संस्थान हैं जहाँ कर्मचारी को साल में कम से कम दो सौ घंटे ट्रेनिंग लेना अनिवार्य हैं । प्रशिक्षित कर्मचारी किसी भी ऑर्गनायज़ेशन को लीडिंग बनाए रखने के लिए सबसे बड़ी सम्पत्ति हैं ।
रायचंद्र की सदा ही जय
हमने रोज़मर्रा के जीवन में दो तरह के लोग देखे होंगे रायचंद्र और कर्मचंद्र । रायचंद्र हर मुद्दे पर अपनी राय देते हैं और स्वयं ज़िम्मेदारी लेने से कोसों दूर रहते हैं । कर्मचंद्र काम करने में सबसे आगे रहते हैं लेकिन रायचंद्र बाज़ी मार ले जाते हैं और कर्मचंद्र के करम फूटे ही रहते हैं । रायचंद्र वहाँ भी अपनी राय बेबाक़ी से देते हैं जहाँ उन्हें शून्य से भी कम जानकारी होती हैं इसे कहते हैं चाय तो बोले साथ में छन्नी भी मुँह खोले। रायचंद्र केवल राय ही नहीं देते अपनी छाती खुद ही ठोकते हैं । रायचंद्र माहिर शब्दवीर होते हैं हवाई क़िले बनाने में माहिर रायचंद्र हमेशा फ़ायदे में रहते हैं ।
नर दा का न्यू ईयर रिजोलूसन
नारायण सिंह को लोग नर दा के नाम से पुकारते हैं । नर दा एक नम्बर के बेवड़े हैं सुबह कुल्ला भी शराब से करते हैं । हर साल शराब छोड़ने का रिजोलूसन लेते हैं फिर थर्टी फ़र्स्ट को ये सोचकर जमकर पीते हैं कि कल यानी अगले साल से शराब छोड़ देंगे । रात में इतनी ज़्यादा हो जाती है कि उतारने के लिए साल के पहले दिन ही सुबह ही दो पेग मजबूरी में लगाने पड़ते हैं और न्यू ईयर रिजोलूसन पहले ही दिन दम तोड़ देता है ।
अपने पिछले अनुभवों से सबक़ लेते हुए नर दा ने 2024 के लिए एक रिजोलूसन में तब्दीली की है । अब उन्होंने नए साल में गीता पाठ का संकल्प लिया है । नर दा 2024 में प्रतिदिन गीता के कुछ श्लोकों का पाठ करेंगे ।